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बजट (भारत)

 बजट (भारत)

* भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत बजट पेश किया जाता है

* बजट की तारीख राष्ट्रपति तय करता है

* भाषण पढ़ने के लिए लोकसभा अध्यक्ष द्वारा वित्त मंत्री को आमंत्रित किया जाता है

* बजट पहले लोकसभा में पेश होता है इसके बाद राज्यसभा में

* बजट आम तौर पर फरवरी में ही पेश होता है

* ब्रिटिश काल में 1921 में पहली बार सामान्य बजट से रेल बजट

 अलग हुआ था लेकर 2017 में इसे फिर से एक कर दिया गया

* संविधान में बजट का उल्लेख वार्षिक वित्तीय वक्तव्य के रूप में है

* बजट से पहले हलवा रस्म निभाया जाता है

* शुरुआत में बजट पेपर्स राष्ट्रपति भवन में प्रिंट होते थे लेकिन 1950

 में लीक होने के कारण एक सरकारी प्रेस को यह जिम्मेदारी मिली फिर 

1980 से यह वित्त मंत्रालय में छपता है

* बजट निर्माण की प्रक्रिया बेहद गोपनीय होती है बजट पेश होने से 2

 दिन पहले वित्त मंत्रालय को पूरी तरह से सील कर दिया जाता है

* आय और व्यय की सूची को बजट कहते हैं

* बजट शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के बोगेट शब्द से हुई है जिसका फ्रांसीसी 

शब्द बौऊगेट है जिसका आशय चमड़े के थैले से होता है

* बजट किसी देश संस्था व्यक्तिगत अथवा किसी परिवार का भी हो सकता है

* बजट भविष्य में किए जाने वाले खर्च का अनुमान होता है

* बजट में सरकार की आर्थिक नीतियों का स्पष्ट संकेत मिलता है

* बजट बनने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती है

* भारत में पहली बार विधिवत बजट ब्रिटिश काल में जेम्स विल्सन ने 7 अप्रैल 

1860 को पेश किया था

* आजाद भारत का पहला आम बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आरके षणमुखम 

चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया इन्होंने ही पहली बार आंतरिक बजट

 शब्द का प्रयोग किया था

* गणतंत्र भारत का पहला बजट जॉन मथाई ने 28 फरवरी 1950 को पेश किया

* ब्रिटिश काल से साल 2000 तक बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था

* 2001 में वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट सुबह 11:00 बजे पेश किया और 

तभी से यह 11:00 बजे पेश होता है

* मोरारजी देसाई के नाम अब तक सर्वाधिक 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है

* इंदिरा गांधी इकलौती महिला वित्त मंत्री है जिन्होंने 1987-71 में बजट पेश किया

* जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने 

बजट पेश किया

* मोरारजी देसाई के नाम अपने जन्मदिन 29 फरवरी 1964 और 1968 

को बजट पेश करने का रिकॉर्ड है

* सी डी देशमुख आरबीआई के पहले गवर्नर थे जिन्होंने अंतरिम बजट पेश किया

* 1955-56 से बजट हिंदी में भी तैयार होने लगा

* अब तक चार ऐसे वित्त मंत्री रहे जो आगे चलकर प्रधानमंत्री बने

 वह मोरारजी देसाई चौधरी चरण सिंह वीपी सिंह और मनमोहन सिंह

* आर वेंकटरमण और प्रणव मुखर्जी ऐसे वित्त मंत्री रहे जो बाद में राष्ट्रपति बने

* बजट, एक निश्चित अवधि में सरकार की आय और व्यय का 

लेखा-जोखा होता है अर्थात बजट में यह बताया जाता है कि सरकार के पास रुपया कहां से आया और कहां गया?

* सरकार हर साल बजट बनाकर दो काम करती है-

> अगले वित्तवर्ष में देश के विभिन्‍न क्षेत्रों (जैसे- उद्योग, विनिर्माण, 

शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि) में किए जाने वाले विभिन्‍न प्रकार

 के विकास कार्यों में होने वाले खर्चों का अनुमान लगाती है

> अगले वित्तवर्ष के लिए अनुमानित खर्चों को पूरा करने के लिए 


धन (Funds) की व्‍यवस्‍था करने के लिए सम्‍यक उपाय (जैसे- कुछ 

चीजों पर कुछ खास तरह के नए Tax लगाने या बढ़ाने अथवा किसी वस्तु

 या सेवा पर पहले से दी जा रही सब्सिडी (Subsidy) को कम या खत्‍म करना आदि) करती है

* बजट मुख्यतः पांच प्रकार के होते हैं, जो निम्न हैं:

* पारम्परिक या आम बजट (Aam Budget) इस बजट में सरकार की आय औ

र व्यय का लेखा-जोखा होता है इस प्रकार के बजट का उद्देश्य सरकारी खर्चों

 पर नियंत्रण करना तथा विकास कार्यों को लागू करना था न कि तीव्र गति से विकास करना

* निष्पादन बजट (Performance Budget): किसी कार्य के परिणामों को 

आधार मानकर बनाये जाने वाले बजट को निष्पादन बजट कहते हैं इसमें 

सरकार जनता की भलाई के लिए क्या कर रही है? कितना कर रही है? और

 किस कीमत पर कर रही है? जैसी सभी बातों को शामिल किया जाता है 

भारत में इसे उपलब्धि बजट या कार्यपूर्ति बजट भी कहा जाता है

* शून्य आधारित बजट (Zero Based Budget): भारत में इस बजट को अपनाने के दो प्रमुख कारण है:

> देश के बजट में लगातार होने वाला घाटा

> निष्पादन बजट प्रणाली का सफल क्रियान्वयन न हो पाना

* शून्य आधारित बजट में पिछले वित्त वर्षों में किए गए व्ययों पर विचार नहीं किया जाता है और न ही पिछले वित्त वर्षों के व्यय को आगामी वर्षों के लिए उपयोग किया जाता है बल्कि इस बजट में इस बात पर जोर दिया जाता है कि व्यय किया जाय या नहीं अर्थात व्यय में वृद्धि या कमी के बजाय व्यय किया जाय या नहीं इस पर विचार किया जाता है

* परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget): भारत में 2005 में पहली बार “परिणामोन्मुखी बजट” पेश किया गया था जिसके अंतर्गत आम बजट में आवंटित धनराशि का विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों ने किस प्रकार उपयोग किया उसका ब्यौरा देना आवश्यक था

* लैंगिक बजट (Gender Budget): किसी बजट में उन तमाम योजनाओं और कार्यकमों पर किया गया खर्च जिनका संबंध महिला और शिशु कल्याण से होता है, उसका उल्लेख लैंगिक बजट माना जाता है इसके माध्यम से सरकार महिलाओं के विकास, कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष एक निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रावधान करती है

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